June 16, 2024

निकाय चुनाव में देरी को लेकर HC सख्त, प्रमुख सचिव शहरी विकास से 48 घंटे में मांगा जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश में निकाय चुनाव की तय सीमा समाप्त होने के बाद भी सरकार की ओर से चुनाव नहीं कराने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु को नोटिस जारी कर 48 घंटे में जवाब देने को कहा है। इस मामले में 11 जून को सुनवाई होगी। हाई कोर्ट के वकील डीके जोशी ने कहा कि राज्य सरकार को आज ही नोटिस सर्व करा दी गई है। 

दरअसल, जसपुर निवासी मो. अनीश और अन्य ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि नगर पालिकाओं और नगर निकायों का कार्यकाल दिसंबर माह में समाप्त हो गया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उत्तराखंड में नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल 02 दिसंबर को समाप्त हो गया था। सरकार ने निकायों को प्रशासकों के हवाले कर दिया। इस बीच प्रशासकों का कार्यकाल विगत 02 जून को खत्म हो गया और सरकार ने पुन: प्रशासकों का कार्यकाल तीन महीने बढ़ा दिया। सरकार चुनाव कराने में विफल रही है।

याचिका में कहा गया है कि नगर निकाय का कार्यकाल समाप्त होने के एक माह बाद भी सरकार ने चुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित नहीं किया। सरकार ने इसके उलट निकायों में अपने प्रशासक बैठा दिए हैं। यह संविधान विरुद्ध है। लोकसभा और विधानसभा के चुनाव निर्धारित तय समय में होते हैं, लेकिन निकायों के तय समय में क्यों नही होते? नियमानुसार, निकायों के कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो जाना था, जो अभी तक नहीं हुआ है। दूसरी ओर प्रशासक नियुक्त होने की वजह से आम जनता को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। निकायों के चुनाव कराने और सरकार को याद दिलाने के लिए पूर्व में ही एक जनहित याचिका विचाराधीन है। जनहित याचिका में कहा है कि सरकार को कोई अधिकार नहीं है कि वह निकायों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त करे। प्रशासक तब नियुक्त किया जाता है, जब कोई निकाय भंग की जाती है।

अदालत ने प्रमुख सचिव को जारी किया नोटिस 

वहीं हाईकोर्ट ने राजीव लोचन साह बनाम राज्य सरकार मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए 09 जनवरी, 2024 और 16 अप्रैल, 2024 को आदेश जारी कर समय पर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार विफल रही है। अवमानना याचिका में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु और अपर सचिव नितिन भदौरियों को पक्षकार बनाते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई है। अदालत ने प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 48 घंटे में जवाब देने को कहा है।

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