March 4, 2024

लोक गायिका रेशमा शाह ने इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल में बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव

मसूरी। उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोक गायिका रेशमा शाह ने हाल ही में इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल में उत्तराखंड सहित देश का प्रतिनिधित्व किया व राज्य का गौरव बढ़ाया। पत्रकारों से बातचीत में रेशमा ने बताया कि पहली बार वह इतने बड़े मंच पर गयी व उत्तराखंड सहित देश का प्रतिनिधित्व किया। वहीं अपनी लोक संस्कृति से अवगत कराया, जिसकी सभी देशों के लोक गायकों ने सराहना की व उनको सम्मानित किया गया।

मसूरी में पत्रकारों से बातचीत में लोक गायिका रेशमा ने बताया कि भारत सरकार ने दो दिवसीय इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल का आयोजन किया, जिसमें एक दिन दिल्ली व दूसरे दिन अहमदाबाद में कार्यक्रम आयोजित किए गये। उन्होंने कहा कि फेस्टिवल में पूरे देश से वह अकेली प्रतिभागी थी। इस फोक फेस्टिवल में सात देशों तुर्की, पाकिस्तान सहित अन्य देशों के लोक गायकों ने अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि विदेशों से आये लोक गायकों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने बताया कि इस फेस्टिवल में उन्हें 15 मिनट का समय दिया गया, जिसमें उन्होंने तीन लोकगीत गाये व अपने उत्तराखंड की संस्कृति व लोक गीतो को सुनाने का अवसर मिला, जो सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विदेशी फोक गायकों ने अच्छा गाया, हालांकि उनकी समझ में नहीं आया लेकिन उनका जो संगीत था उससे सीखने को मिला कि हम और अच्छा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने हारूल सुनाया जिसमें मोड़े मोडाइये सुनाया। वहीं दूसरा गीत झेंता सुनाया जिसमें पौराणिक गीत उनाये ताउं फडी बल भेटुडा काई लागी पातड़ी व तीसरा पांडव जागर सुनाया, ये पैंदा होई जायां पांच पांडव, पैदा होई जाया काली द्रोपदी। रेशमा ने कहा कि इस फेस्टिवल में उन्होंने उत्तराखंडी परिधान व आभूषण पहने थे जिससे सभी खासे आकर्षित हुए। वहीं साथ में ढोल दमाउं व दो कोरस कलाकार भी थे, वह भी पूरे उत्तराखंडी परिधान में थे। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की एंकर ने जो गीत गाये उसके बारे में पूरी व्याख्या की ताकि विदेशी गायकों को इसके महत्व की जानकारी मिल सके। इसके बारे में उन्हें पहले ही बता दिया गया था।

इस मौके पर जब गीत गाये तो पीछे स्क्रीन में पूरे उत्तराखंड के देवी देवताओं के मदिर, उत्तराखंड की खूबसूरती, यहां के नृत्य के वीडियों दिखाये गये। जब उन्होंने गीत गाए तो सभी विदेशी गायकों सहित स्रोता उठ खडे हुए व तालियां बजा कर सम्मान दिया। वहीं उन्हें मंच पर सम्मानित भी किया गया। लोक गायिका रेशमा शाह ने सभी को बूढ़ी दिवाली बधाई दी व कहा कि यह जौनपुर, जौनसार व रंवाई का सबसे बड़ा व प्रमुख पर्व है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड पांडवों की भूमि है जिसमें दिवाली पर पांडव नृत्य किया जाता है।

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