May 24, 2024

ज्योतिष महाकुंभ में जाने माने ज्योतिषों ने मानव जीवन पर ग्रहों के पड़ने वाले प्रभावो पर की चर्चा

मसूरी। फरीदाबाद ज्योतिष संघ के तत्वाधान में चल रहे एशियन एस्ट्रो मीट में देश विदेश से आये विभिन्न विधाओं के जाने माने ज्योतिषों ने  मानव जीवन पर ग्रहों के पड़ने वाले प्रभावो पर चर्चा की व आपस में शास्त्रार्थ किया।

इस मौके पर आध्यात्म ज्योतिष के विद्वान आचार्य जितेंद्र शर्मा ने कहा कि आध्यात्म जो सनातन धर्म की मूल संस्कृति है उसको लेकर आगे बढ़े जिसे आज लोग भूलते जा रहे हैं। आध्यात्म के मुूल तत्वों की ओर जाना पड़ेगा व उसे अपने घर से शुरू करना होगा, इसके लिए अपने जीवन पद्याति शैली व भाषा के आधार पर शुरू करना होगा।

ज्योतिष गुरू भवन दीवान विश्वकर्मा ने कहा कि यह मीट बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसमें विभिन्न विधाओं के ज्योतिष आये हैं व वह अपने स्तर पर ज्योतिष पर विचार रख रहे हैं। इस ज्योतिष महाकुभं में, न्यूरोलाजी एक्सपर्ट, कर्मकांडी, टैरो एक्सपर्ट, तत्रविद्या सहित अनेक विषयों के देश विदेश से ज्योतिष आये हैं। जिस तरह चार्टर एकाउंटेट की फेर्टेनिटी होती है उसी तरह ज्योतिष की भी होती है जिसके अंदर मिल करके आध्यात्म, सनातन संस्कृति को फैलाकर ज्योतिष के प्रति जो भ्रांतियां है उसे दूर करें। व सही तरीके से इन विधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में खाने की तरह जरूरी है। उसकों मानना चाहिए ताकि उसे जीवन में उतारना चाहिए वरना जीवन के सारे सुख समाप्त हो जाता है। डा. शालिनी ने कहा कि वह वास्तु व एनर्जी सांइंस पर कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो तकनीकि है उसमें जा रहे हैं जो कि वास्तु के हिसाब से ठीक नहीं है। उन्होंने कहाकि आज वर्क फार्म होम का नया सिस्टम हो गया है व अपने कार्यालय को अपने घर में ले आये व इलेक्ट्रानिक वस्तुओं का उपयोग कर रहे है जिससे घर की सकारात्मक उर्जा समाप्त होकर नकारात्मक उर्जा घर कर रही है जिससे परिवार में परेशानियां बढ रही हैं क्यो कि यह केतु के तहत आता है।

डा. सुमन कोहली ने बताया कि वह ज्योतिष पढाती भी है। जब लोगों को इसके बारे में पता नहीं था तब लोग बीमार नहीं होते थे लेकिन आज घर मल्टी स्टोरी हो गये हैं जिससे सकारात्म उर्जा समाप्त होती जा रही है वहीं सजावट के लिए लोग कई तरह के प्रयोग कर रहे हैं जो समस्याएं बढा रहा है। घरों में टायलेट बैडरूम के साथ हो गये हैं कीचन के साथ बर्तन धोने की व्यवस्था हो गयी है जिससे घरों में विवाद बढ़ गये हैं। पहले परिवार एक साथ रहते थे तो हर किसी के ग्रह एक दूसरे को मदद करते थे लेकिन आज एकल परिवार होने से परिवार के अन्य जनों के ग्रहों का लाभ नहीं मिल पाता है।

आचार्य सुब्रहमनीन कृष्णा स्वामी ने कहा कि हीलिंग व रेकी आदि से जुड़ा हूं, यहां पर विभिन्न विधाओं के ज्योतिषों की विधाओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। नलिनी त्रिखा तनेजा ने कहा कि आध्यातम पर कार्य करती हूँ तथा मेडिटेशियन से लोगों का उपचार करती हूं। तथा कई परिवारों को तोड़ने से बचाया व जो बच्चे डिप्रेशन मे ंहै उन्हें मेडिटेशन से ठीक किया है। आचार्य अमित मुदगल ने कहा कि वह वैदिक व लाल किताब के माध्यम से कार्य करते हैं। यहां पर अनेक विद्वानों के माध्यम से ज्योतिष की धाराएं बह रही है व शास्त्रार्थ किए जा रहे हैं। इस मौके पर आचार्य शंभूनाथ ने कहा कि बिना संकल्प के कोई भी कार्य सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ज्योतिष किसी का भाग्य नहीं बदल सकता उसे ज्ञान दे सकता है उसके रास्ते में आने वाले ग्रहों की दशा सुधार सकता है।

इस मौके पर श्रीलंका से आये डा. रंजीथ ओपाथा, राज शर्मा, सुहास डोगरी, डा. ललिता कश्यप, इंद्र कश्यप,सुरिंदर कपूर, डा. बाल्मीकि प्रसाद, डा. जसविंदर कौर, राशी साहनी शर्मा, संजय नंदा, सुमित अरोरा, बोमिन सिंह, कमल किशोर वर्मा, शैफाली, कीर्ति कुमार, अमित मुदगल, अनिल झांब, शैलंेद्र गर्ग, विपिन अरोरा, त्रिप्ता अरोरा, दिनेश शर्मा, जीडी दयाल, प्रभजोत कौर, अशोक कुमार, साक्षी भार्गव, दिव्या ठाकुरी, डा. चक्र, प्रभाकर हरीश, कल्पला शर्मा, कविता वशिष्ठ, नलिनी त्रिखात तनेजा, नीतू मिश्रा, गौरव शर्मा आदि मौजूद रहे।

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