June 16, 2024

चौकिघाट से लेकर मालन नदी उद्गम क्षेत्र मलनियाँ (चंडा) को ट्रैक ऑफ द ईयर-2023 के लिए चुना गया

पौड़ी। उत्तराखण्ड सरकार के उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद द्वारा जनपद पौड़ी गढ़वाल के चौकिघाट (वर्तमान कण्वाश्रम) से लेकर मालन नदी उद्गम क्षेत्र मलनियाँ (चंडा) को ट्रैक ऑफ द ईयर-2023 के लिए चुना गया है। बेबेरी एडवेंचर लैंसडौन के 20 सदस्यीय दल की पहली ट्रैकिंग टीम को कण्वाश्रम स्थित जीएमवीएन के बंगले से विगत 08 नवम्बर 2023 को फ्लैग ऑफ़ कर रवाना किया है।

विगत 31 बर्षों से कण्वाश्रम व मालन घाटी की वैदिक कालीन सभ्यता पर शोध कर रहे वरिष्ठ पत्रकार व बद्री केदार सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष मनोज इष्टवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह दल बेबेरी टूर ऑपरेटर लैंसडौन के टीम लीडर कर्नल आशीष इष्टवाल के नेतृत्व में सम्पूर्ण मालन के क्षेत्र का भ्रमण कर इसे उत्तराखंड पर्यटन के मैप में शामिल करेगी। उन्होंने कहा कि यह सरल काम नहीं था लेकिन विगत तीन बर्षों से लगातार सरकार से जनसंवाद, ढाकर शोध यात्रा, ट्रैकिंग टीम कोटद्वार की पहल व ग्रामीण की एकजुटता के बाद आख़िरकार प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधान सभा अध्यक्षा ऋतु भूषण खंडूरी, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, पर्यटन सचिव सचिन कुर्वे, जिलाधिकारी आशीष चौहान व उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (साहसिक विंग) कर्नल अश्विनी पुंडीर की पहल पर आखिरकार मालन घाटी क्षेत्र ट्रैक ऑफ़ द ईयर-2023 घोषित की गई है। उन्होंने कहा कि सन 2021 में इसके लिए मालन घाटी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का प्रस्ताव हमारे द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा गया था जो तीन साल बाद फलीभूत हुआ।

उन्होंने कहा है कि इस दौरान ट्रैकिंग राजदरबार (जहाँ स्वर्ग अप्सरा मेनका ने राजा विश्वमित्र की तपस्या भंग की), सप्तऋषि मंडल (मालिनी घाटी में व्याप्त विभिन्न तथ्यों, किंवदन्तियों व लोक में प्रचलित ऋषि कण्व-गौतमी, ऋषि विश्वामित्र मेनका, ऋषि दुर्भाषा- शकुन्तला, ऋषि मरीचि शकुन्तला, राजा दुष्यंत- शकुन्तला, ऋषि च्वयन व ऋषि चरक, ऋषि कश्यप व ऋषि भृगु से सम्बंधित विभिन्न जानकारियां प्राप्त की)।

बद्री केदार सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान द्वारा इस क्षेत्र में विगत कई बर्षों से ट्रैकिंग के साथ-साथ शोध कार्य भी किया जा रहा है। संस्थान के अध्यक्ष मनोज इष्टवाल जानकारी देते हुए बताते हैं कि यूँ तो पूरी मालन नदी घाटी में कण्वाश्रम हैं लेकिन हमें यह भी जानना होगा कि क्या महर्षि या ऋषि कण्व सतयुग, वैदिक काल, द्वापर, त्रेता व कलयुग के इन लगभग 5000 बर्षों में एक ही जन्में? अगर ऐसा है तो हमारे पुराणों व धर्म ग्रंथों में 08 कण्व क्यों गिने जाते हैं? क्या कभी हमने उनकी वंशावली खंगालने की कोशिश की? उन्होंने इस बार पर घोर आपत्ति जताई कि अल्पज्ञान व बिना शोध के ही पुस्तकों के संदर्भों से घर बैठकर पुस्तक लिखने वाले हमारे ज्यादात्तर इतिहासकारों ने इस बात की खोजबीन भी की कि आखिर किस कण्व का किस भूमि में आश्रम है? क्या हमने यह भी कोशिश की कि महर्षि कण्व व ऋषि कण्व में कोई अंतर है? क्या 08 के 08 कण्व वैदिक काल में ही जन्मे? उन्होंने कहा कि इस पर अभी भी चर्चा व व्यापक शोध की आवश्यकता है व जहाँ तक रही महाकवि कालीदास द्वारा लिखे गए नाट्य-शास्त्र “अभिज्ञान शाकुंतलम” की बात तो उसके एक एक प्रमाण यहाँ के आम जन जीवन के साथ आज भी जुड़े हुए हैं।

वरिष्ठ पत्रकार व बद्रीकेदार सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष मनोज इष्टवाल कहते हैं कि मालन नदी में बहकर आई मूर्तियाँ इस बात की प्रमाणिकता देती हैं कि यहाँ कण्वाश्रम कहीं न कहीं धरती की गोद में समाया हुआ है व आज नहीं तो आने वाले कल में वह भी अवश्य अयोध्या के राम मंदिर की भांति स्वयं ही प्रकट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान कण्वाश्रम से ऊपर चौकी-घाटा से लेकर मलनिया- चंडा शिखर तक वैदिक कालीन सभ्यता के अंश-वंश कहीं ण कहीं दिखने को मिलते हैं। अला शब्द सिर्फ गढ़वाल क्षेत्र में प्रचलन है जिसका प्रयोग महाकवि कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम में किया है। यहाँ आज भी सह्त्रधारा (जहाँ ऋषि स्नान का महातम्य था) है। इसके अलावा बिस्तर-काटल (ऋषि विश्वमित्र की तपस्थली), पत्थरै की बस्सी (ऋषि विश्वामित्र गुफा जहाँ विश्वामित्र ऋषि ने गायत्री मंत्र का जाप किया), मथाणा (महर्षि कण्व के गुरुकुल वैदिक आश्रम पद्दत्ति का सम्भावित विद्यालय), चौंडल गड्डी (ऋषि च्वयन की आयुष स्थली/तपस्थली), मैती-काटल (ऋषि मरीचि आश्रम व इंद्र के स्वर्गवाहन चालक मातली द्वारा स्वर्गवाहन उतारने का स्थान), चरेख (ऋषि चरक का निवास स्थल), मयेडा (मएड़ा) (स्वर्ग अप्सरा मेनका का निवास स्थल।) किमसेरा (ऋषि कण्व का निवास स्थल व दुष्यंत- शकुन्तला का गंदर्ब विवाह स्थल।), फलनखेत (शकुन्तला का फल बागीचा।), जुड्डा-रौडियाल (जड़ी-बूटी औषधि जंगल।) गौतमी वन (महर्षि कण्व की पत्नी गौतमी का निवास स्थल) मालनियाँ (मालिनी नदी का उद्गम।) भरतपुर (दुष्यंत शकुन्तला पुत्र चक्रवर्ती भर का जन्मस्थल।), सिंहपाणी (वह जंगल जहाँ भरत ने शेर के दांत गिने थे।) शाकुंतधार (जहाँ मांसाहारी शुकशावकों (सेंट्रला पक्षियों) द्वारा मेनका गर्भ से जन्मी शकुंतला के प्राणों की रक्षा की।) कश्याली (महर्षि कश्यप का निवास स्थल।), भृगुखाल (भृगु ऋषि की तपस्थली) इत्यादि स्थानों की प्रमाणिकता बताती है कि यही क्षेत्र महर्षि कण्व का कण्वाश्रम क्षेत्र व सप्तऋषि मंडप क्षेत्र है। मनोज इष्टवाल कहते हैं कि ट्रैक ऑफ़ द ईयर-2023 की यह प्रथम टीम इन स्थलों को चिन्हित करने का काम भी करेगी ताकि इस ट्रैकिंग रूट पर विश्व भर के साहसिक पर्यटन उमड़ सकें। उन्होंने कहा कि यह मालन घाटी पूर्व में ढाकरी रूट व डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की पैदल सड़क (ट्रैक रूट) जो लगभग 50 से 60 गाँवों की भौतिकता को आपस में जोड़कर आगे बढ़ती है।

ज्ञात हो कि यह ट्रैकिंग दल विगत 08 नवंबर 2023 को कण्वाश्रम (चौकीघाटा) से लालपुल – किमी., सहत्रधारा , आमडाली , मक्वाठाट , ईडा गदेरा, खैरगड्डी, मरणखेत पहुंचा जहाँ मथाणा गाँव के ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता संदीप बिष्ट के नेतृत्व में दल के सदस्यों का स्वागत सत्कार चाय नाश्ते के साथ किया गया। तदोपरान्त दल चौंडल गड्डी -मैती काटल होते हुए चुन्ना-मयेडा, होकर किमसेरा गाँव पहुंची। श्री कण्वेश्वर सांस्कृतिक विकास समिति के अध्यक्ष सुमन कुकरेती व ग्राम प्रधान के नेतृत्व में क़ीमसेरा के ग्रामीणों ने फूल मालाओं से दल का स्वागत किया।

अगले दिन गौतमी वन, जुड्ड़ा रौड़याल, जुड्डा, सौड , मांडई, बिजनूर होकर मालन नदी उदगम स्थल मलनिया- बड़ोलगाँव चंडा पर्वत शिखर तक 22.50 किमी. तक यात्रा की। मेरा गाँव मेरी विरासत के अध्यक्ष भगवती प्रसाद काला के नेतृत्व में मलनिया-बिडोलगाँव वासियों ने फूल मालाओं से ट्रैक ऑफ़ ईयर -2023 के सभी सदस्यों का फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग के जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश सिंह खत्री ने जानकारी देते हुए बताया है कि पर्यटन विभाग मालन घाटी में ट्रैक ऑफ़ द ईयर -2023 के पहले ट्रैकिंग दल को बेबेरी टूर ऑपरेटर लैंसडौन के अधीन भेज रहा है। इसमें कर्नल टीसी शर्मा, कर्नल आशीष इष्टवाल, विंग कमांडर सुधीर कुट्टी, विंग कमांडर नमित रावत, वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल, एडवोकेट अमित सजवाण, वरिष्ठ पत्रकार गणेश काला, समाजसेवी प्रणिता कंडवाल, दिग्विजय सिंह नेगी, मोहित कंडवाल, प्रशांत कुकरेती, विवेक सिंह नेगी, श्रेय सुन्द्रियाल, अजय अधिकारी, राजन सिंह नेगी , ऋतुराज सिंह रावत, शिवानी भंडारी फारेस्ट गार्ड सुरेन्द्र सिंह, फारेस्ट गार्ड विनय सिंह, वाचर विजेंद्र सिंह एवं वन गूर्जर आमीर इत्यादि शामिल हैं।

इस दौरान पहलवान दीपक अनुसुया प्रसाद भारद्वाज, राधेश्याम काला, ओम प्रकाश काला, कैलाश कुकरेती (सरपंच मलनिया गाँव) नंदन मोहन (सरपंच बड़ोलगाँव) सुदर्शन काला, राजेश काला, जगदम्बा प्रसाद, संदीप काला, किरण कुकरेती, विधाता देवी, कमला देवी, पुष्पा देवी, मंजू देवी व आस -पास क्षेत्र के ग्रामीणों ने बेहद गर्मजोशी के साथ इस पर्यटक दल का नागरिक अभिनन्दन भी किया है।

 

 

 

 

 

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