March 4, 2024

साकेत बहुगुणा समेत 18 निदेशकों पर 6,000 करोड़ के फर्जीवाड़ा मामले में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कोर्ट के आदेश पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा समेत 18 निदेशकों पर 6,000 करोड़ के फर्जीवाड़ा मामले में धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, 323, 504, 506 में मुकदमा दर्ज किया गया है।

दरअसल मामला गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके का है। जानकारी के अनुसार, इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के 18 निदेशकों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। शिप्रा ग्रुप्स की तरफ से वादी अमित वालिया ने मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि 18 आरोपियों ने मिलकर 6,000 करोड़ के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। कोर्ट के आदेश पर इंदिरापुरम में मुकदमा दर्ज किया गया है।

शिकायतकर्ता अमित वालिया की अर्जी पर कोर्ट ने मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। एफआईआर के मुताबिक, अमित वालिया की रियल एस्टेट कंपनी को लोन की आवश्यकता थी। उसी सिलसिले में बड़ी फाइनेंस कंपनी के डायरेक्टर से वालिया ने मुलाकात की। इस दौरान कंपनी ने 1939 करोड़ लोन देने का वादा किया। साथ ही फाइनेंस कंपनी ने यह रुपया कम ब्याज पर देने का वादा किया था। हालांकि इसके एवज में रियल एस्टेट कंपनी के एसेट गिरवी रखने को कहा गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सभी संपत्ति को गिरवी रखकर रियल एस्टेट कंपनी ने लोन लेने के लिए औपचारिकता पूरी की, लेकिन पूरा लोन नहीं दिया गया। सिर्फ 866 करोड़ रुपए के आसपास लोन दिया गया। रियल एस्टेट कंपनी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के निदेशकों की नियत साफ नहीं थी। संपत्ति हड़पने के लिए यह सब कुछ किया गया। साल 2020 से पहले का मामला है। इस बीच में कई वर्ष बीत जाने के बाद भी जब मामले का कोई हल नहीं निकला तो एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोप लगाया जा रहा है कि अब फाइनेंस कंपनी उनके गिरवी संपत्ति को लेकर मनमाना रवैया अपना रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी, 323, 504, 506 में मुकदमा दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि एक समय उत्तराखंड में साकेत बहुगुणा सत्ता के गलियारे में केंद्र बिंदु बने रहते थे। उस समय उत्तराखंड में साकेत के पिता विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री हुआ करते थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में साकेत बहुगुणा ने टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन जनता ने सीधे तौर पर साकेत को नकारते हुए भाजपा प्रत्याशी को जिताया। इसके बाद साकेत बहुगुणा ने उत्तराखंड से किनारा करते हुए अपने व्यवसाय में जुट गए। 2016 में विजय बहुगुणा ने हरीश रावत सरकार को गिरा कर भाजपा में शामिल हो गए थे। 2016 के बाद से विजय बहुगुणा और साकेत बहुगुणा की उत्तराखण्ड में सक्रियता भी शून्य ही रही। अब एक बार फिर उत्तराखंड के सत्ता के गलियारों में साकेत बहुगुणा का नाम फिर सुनाई दे रहा है जिसके बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

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